नासिक टीसीएस मामले में सुनियोजित नफरत अभियान की एसडीपीआई ने निंदा की

सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया की राष्ट्रीय महासचिव यास्मीन फारूकी ने नासिक स्थित टीसीएस बीपीओ इकाई में कथित यौन उत्पीड़न और धार्मिक दबाव के आरोपों को लेकर चलाए जा रहे घृणित अभियान और सुनियोजित मामले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि ये घटनाक्रम निर्दोष मुस्लिम युवाओं को बदनाम करने, कार्यस्थल को सांप्रदायिक आधार पर विभाजित करने और अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने के लिए अक्सर इस्तेमाल किए जाने वाले खतरनाक “लव जिहाद” नैरेटिव को पुनर्जीवित करने की एक पूर्व नियोजित साजिश की ओर संकेत करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि दक्षिणपंथी हिंदुत्व से जुड़े सोशल मीडिया हैंडल्स ने तथाकथित “कॉरपोरेट जिहाद” सिद्धांत को आक्रामक रूप से आगे बढ़ाया है, जिससे डिजिटल प्लेटफॉर्म और टीवी बहसों में गलत जानकारी और सांप्रदायिक विद्वेष फैलाकर माहौल को भड़काने और मुस्लिम समुदाय को डराने का प्रयास किया जा रहा है।

यास्मीन फारूकी ने कहा कि आरोपियों के परिवारों ने यह उजागर किया है कि कैसे एक व्यक्तिगत मामले को बजरंग दल की दखलअंदाजी के जरिए बड़े विवाद में बदल दिया गया। जो मामला सामान्य कार्यस्थल के मुद्दों के रूप में शुरू हुआ था, उसे चुनिंदा लीक, जबरन धर्म परिवर्तन के बढ़ा-चढ़ाकर किए गए दावों और बेबुनियाद आरोपों के माध्यम से तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि निदा खान को इस पूरे मामले की मास्टरमाइंड और वरिष्ठ एचआर अधिकारी के रूप में पेश करना पूरी तरह गलत है। टीसीएस ने पुष्टि की है कि वह न तो एचआर मैनेजर हैं और न ही भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी हैं, बल्कि एक प्रोसेस एसोसिएट के रूप में कार्यरत हैं। उनके परिवार ने भी बताया है कि वह इस समय मुंबई में अपने वैवाहिक घर पर हैं, अपने पहले बच्चे की उम्मीद कर रही हैं और फरार नहीं हैं, बल्कि जांच में सहयोग करने के लिए तैयार हैं। इसके बावजूद, उनके और उनके परिवार के खिलाफ गलत जानकारी का प्रसार जारी है।

रिपोर्ट किए गए 40 दिन के अंडरकवर ऑपरेशन, गिरफ्तारियां और कई एजेंसियों की अचानक भागीदारी पर चिंता व्यक्त करते हुए यास्मीन फारूकी ने कहा कि ये घटनाएं पक्षपात और मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। उन्होंने कहा कि टीसीएस ने अपने आंतरिक POSH और एथिक्स तंत्र में ऐसी कोई शिकायत दर्ज न होने की बात कही है, जिससे एफआईआर के समय और उद्देश्य पर संदेह पैदा होता है। एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स द्वारा नासिक के दौरे के बाद प्रस्तुत तथ्य-खोज रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि जमीनी हकीकत मीडिया में प्रस्तुत तस्वीर से काफी अलग है और यह मामला संगठित अपराध के बजाय एक सामान्य कानूनी विवाद प्रतीत होता है। यास्मीन फारूकी ने निष्पक्ष और पूर्वाग्रह रहित जांच की मांग की, गिरफ्तार कर्मचारियों की तत्काल रिहाई की बात कही और नफरत व झूठ फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए सभी धर्मनिरपेक्ष ताकतों से इस विभाजनकारी अभियान को खारिज करने का आह्वान किया।