
किसान दिवस: उत्तर से दक्षिण तक, किसान आज भी संकट में
किसान दिवस पर भारत के किसानों की सच्चाई साफ दिखाई देती है। दशकों से किए गए वादों के बावजूद ज़मीन पर हालात ज़्यादा नहीं बदले हैं। उत्तर हो या दक्षिण, जगह अलग हो सकती है, लेकिन किसान की तकलीफ़ लगभग एक-सी है।
उत्तर भारत
पंजाब और हरियाणा में किसान अब भी एमएसपी के भुगतान में देरी, खाद की बढ़ती कीमतों और फसल बीमा के लंबित दावों से जूझ रहे हैं।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों के चीनी मिलों के बकाया अब तक नहीं मिले हैं, जिससे कई परिवार लगातार कर्ज़ में डूबते जा रहे हैं।
राजस्थान में बार-बार सूखा और अनियमित बारिश के कारण फसलें बर्बाद हो रही हैं, लेकिन मुआवज़ा और बीमा राशि देर से और अपर्याप्त मिलती है।
हिमाचल प्रदेश में सेब किसान सस्ते आयात और कोल्ड स्टोरेज की कमी के कारण भारी नुकसान झेल रहे हैं।
दक्षिण भारत
तमिलनाडु के कावेरी डेल्टा में पानी की अनिश्चित आपूर्ति और बदलते मौसम के कारण बार-बार फसलें नष्ट हो रही हैं, और कई बीमा दावे खारिज कर दिए जाते हैं।
कर्नाटक में दाल और मक्का के दाम गिरने से किसान एमएसपी से भी कम कीमत पर फसल बेचने को मजबूर हैं।
आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में बीज, कीटनाशक और बिजली की बढ़ती लागत ने किसानों का कर्ज़ और बढ़ा दिया है।
केरल में रबर और नारियल किसान अस्थिर दामों और कमजोर बाज़ार सुरक्षा से परेशान हैं।
कड़वी सच्चाई
पिछले तीन दशकों से अलग-अलग सरकारों ने योजनाएँ, समितियाँ और नारे दिए, लेकिन आज भी किसान इन समस्याओं से जूझ रहा है:
• सभी फसलों के लिए कानूनी एमएसपी की कोई गारंटी नहीं
• खेती की लागत लगातार बढ़ रही है और कॉरपोरेट नियंत्रण बढ़ता जा रहा है
• फसल बीमा कमजोर है और समय पर नहीं मिलता
• जलवायु परिवर्तन से खतरा बढ़ता जा रहा है
• कर्ज़ और आय की असुरक्षा लगातार बढ़ रही है
भारत की आधी से अधिक आबादी खेती पर निर्भर है, लेकिन देश की जीडीपी में कृषि का योगदान 20 प्रतिशत से भी कम है। यह किसानों की विफलता नहीं, बल्कि व्यवस्था की उपेक्षा का नतीजा है।
एसडीपीआई का पक्ष
सिर्फ प्रतीकात्मक कदम सुधार नहीं हैं। किसानों को मौसमी आश्वासनों नहीं, बल्कि ठोस और संरचनात्मक बदलाव चाहिए।
• सभी फसलों के लिए कानूनी एमएसपी
• छोटे और सीमांत किसानों का कर्ज़ माफ़
• बीज, खाद और बाज़ार पर सार्वजनिक नियंत्रण
• जलवायु-अनुकूल और किसान-केंद्रित नीतियाँ
उत्तर हो या दक्षिण, संदेश साफ है:
दशकों से किसानों के लिए कुछ ठोस नहीं बदला है। अब बदलाव ज़रूरी है।
एसडीपीआई हर क्षेत्र और हर पीढ़ी के किसानों के साथ खड़ी है।
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