
एसडीपीआई ने संयुक्त राष्ट्र आयोग की रिपोर्ट में दर्ज ग़ाज़ा उल्लंघनों की निंदा की, भारत से आवाज़ उठाने की माँग की
सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ इंडिया (SDPI) ने क़ब्ज़े वाले फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों से संबंधित संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जाँच आयोग की नवीनतम रिपोर्ट पर गहरी चिंता व्यक्त की है। रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया है कि अक्टूबर 2025 में हुए युद्धविराम के बाद भी इज़रायली अधिकारी ग़ाज़ा में नरसंहार की गतिविधियों को जारी रखे हुए हैं। रिपोर्ट में वेस्ट बैंक में युद्ध अपराधों और इंसानियत के ख़िलाफ़ अपराधों का भी उल्लेख किया गया है, जिनमें हिरासत में रखे गए लोगों के साथ यातना और यौन हिंसा शामिल हैं। इसके अलावा, रिपोर्ट में 1967 के बाद से वेस्ट बैंक में फ़िलिस्तीनियों के सबसे बड़े विस्थापन का भी ज़िक्र किया गया है।
ये निष्कर्ष मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय क़ानून का गंभीर उल्लंघन दर्शाते हैं। एसडीपीआई इन उल्लंघनों की कड़ी निंदा करती है और माँग करती है कि हिंसा तथा मानवाधिकारों के हनन की इन घटनाओं पर तत्काल रोक लगाई जाए।
एसडीपीआई माँग करती है कि भारत सरकार मानवाधिकारों के प्रति अपनी घोषित प्रतिबद्धता और संयुक्त राष्ट्र के एक सक्रिय सदस्य के रूप में अपनी ज़िम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए फ़िलिस्तीनी जनता के समर्थन में तत्काल सार्वजनिक बयान जारी करे। भारत को संयुक्त राष्ट्र में अपने कूटनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए हिंसा समाप्त कराने तथा अंतरराष्ट्रीय क़ानून और मानवाधिकारों के उल्लंघन के लिए ज़िम्मेदार लोगों की जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में प्रभावी क़दम उठाने चाहिए।
एम. के. फ़ैज़ी,
राष्ट्रीय अध्यक्ष
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