अलीगढ़ में भीड़ द्वारा हिंसा: एसडीपीआई ने सांप्रदायिक हिंसा को बढ़ावा देने वाले नेटवर्क के उन्मूलन की उठाई मांग

सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) की राष्ट्रीय महासचिव यास्मीन फारूकी ने उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में कथित गौमांस ले जाने के संदेह के आधार पर चार व्यक्तियों पर हुए भीषण हमले की कड़ी निंदा की है। यह बर्बर घटना, जिसमें कथित तौर पर दक्षिणपंथी संगठन अखिल भारतीय हिंदू सेना के सदस्य शामिल थे, देश में गोरक्षा के नाम पर बढ़ती भीड़ हिंसा का चिंताजनक उदाहरण है।

इस हमले में न केवल पीड़ितों के वाहन को आग के हवाले कर दिया गया, बल्कि दिल्ली-कानपुर मार्ग को भी बाधित किया गया, जो कानून-व्यवस्था की गंभीर अवहेलना और सांप्रदायिक उन्माद को बढ़ावा देने वाली बयानबाज़ी की भयावहता को दर्शाता है। यह घटनाक्रम भारत के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप के लिए एक प्रत्यक्ष खतरे के रूप में देखा जा रहा है, विशेषकर तब जब मुस्लिमों और अन्य हाशिए पर रहने वाले समुदायों को बार-बार निशाना बनाया जा रहा है।

एसडीपीआई ने इस कृत्य की पारदर्शी, निष्पक्ष और त्वरित जांच की मांग करते हुए कहा है कि केवल “अज्ञात व्यक्तियों” के खिलाफ FIR दर्ज करना अपर्याप्त है, जबकि प्रत्यक्षदर्शियों द्वारा हमलावरों की पहचान स्पष्ट रूप से की गई है। दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी और उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई इस तरह की जघन्य घटनाओं को रोकने तथा नागरिकों के बीच विश्वास बहाल करने के लिए अत्यंत आवश्यक है और साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार को चाहिए कि वह राज्य में बार-बार घटित होने वाली सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए, ऐसे संगठनों और व्यक्तियों के नेटवर्क को नष्ट करे, जो समाज में नफरत और विभाजन फैलाने का कार्य कर रहे हैं। नागरिकों की सुरक्षा और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।