
फॉर्म-6 मामले में चुनाव आयोग का यू-टर्न: एसडीपीआई ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की विश्वसनीयता पर उठाए सवाल
नई दिल्ली: 5 नवंबर 2026
सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान फॉर्म-6 में किए गए अवैध बदलावों को वापस लेने और अपने ऑनलाइन पोर्टल से विवादित अनिवार्य प्रावधान को हटाने के चुनाव आयोग के फैसले की कड़ी निंदा की है। पार्टी ने कहा कि आयोग का अचानक अपने फैसले से पीछे हटना उसकी विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
इस संबंध में जारी एक प्रेस बयान में एसडीपीआई ने कहा:
“कई राज्यों में SIR प्रक्रिया के दौरान फॉर्म-6 में जो बदलाव और शर्तें अनिवार्य की गई थीं, उन्हें स्वयं चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने स्पष्ट रूप से ‘अवैध’ बताया था। अब ये तथ्य सामने आने के बाद चुनाव आयोग का अपने पूर्व रुख से पीछे हटना कई गंभीर संदेह पैदा करता है।
जिन राज्यों में SIR की प्रक्रिया बड़े पैमाने पर चलाई गई, वहां इन अवैध शर्तों के कारण करोड़ों मतदाताओं के नाम मनमाने ढंग से मतदाता सूची से हटा दिए गए। उन राज्यों में चुनाव संपन्न हो जाने और यहां तक कि सरकारें बदल जाने के बाद अब चुनाव आयोग द्वारा अपनी गलती स्वीकार करना और पीछे हटना उस कहावत को चरितार्थ करता है कि ‘अब पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गई खेत।’
सुप्रीम कोर्ट ने भी कहीं इन अनिवार्य शर्तों को मंजूरी नहीं दी है। ऐसे में चुनाव आयोग को जवाब देना चाहिए कि इतने दिनों तक इन अवैध कार्रवाइयों को किसके समर्थन और संरक्षण में अंजाम दिया गया?
चुनाव आयोग को देश के लोकतंत्र की रक्षा करने वाली एक स्वतंत्र और स्वायत्त संस्था के रूप में काम करना चाहिए, न कि कुछ चुनिंदा लोगों के स्वार्थों को पूरा करने के साधन के रूप में। एसडीपीआई आयोग की इन मनमानी कार्रवाइयों की कड़ी निंदा करती है, जिनके चलते उसके अपने आयुक्तों की कड़ी आपत्तियों को भी दरकिनार किया गया और करोड़ों नागरिकों को उनके मताधिकार से वंचित कर दिया गया।
इसलिए एसडीपीआई मांग करती है कि SIR और फॉर्म-6 से जुड़े मनमाने एवं अवैध फैसलों तथा मतदाताओं को उनके मताधिकार से वंचित करने वाले मुख्य चुनाव आयुक्त के मनमाने रवैये की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। इसके साथ ही, चुनाव आयोग यह सुनिश्चित करे कि जिन सभी वास्तविक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, उनके नाम बिना किसी बाधा के तत्काल मतदाता सूची में बहाल किए जाएं।”
मोहम्मद शफी
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष
सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई)
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