
हिंदुस्तान की चुनाव व्यवस्था को भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी से मुक्त किया जाए
यह बेहद चौंकाने वाला है कि गुजरात स्थित छह पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों ने वित्तीय वर्ष 2023–24 में लगभग ₹1,701 करोड़ की राशि एकत्र की, जबकि 2019 से 2024 के बीच उनकी कुल आय ₹2,316 करोड़ रही। इलेक्शन कमीशन ऑफ़ इंडिया (ECI) को प्रस्तुत किए गए ऑडिट किए गए खातों से इन दलों के चुनावी प्रदर्शन और 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान उनके द्वारा कथित रूप से संभाली गई भारी भरकम धनराशि के बीच स्पष्ट विसंगति सामने आती है।
आय के इस घोटालेपूर्ण संचय से इन दलों और सत्तारूढ़ प्रतिष्ठान के बीच गठजोड़ की प्रबल आशंका उत्पन्न होती है। हिंदुस्तान की चुनाव प्रणाली की विश्वसनीयता पहले से ही अस्पष्ट SIR प्रक्रियाओं, अविश्वसनीय EVM और बड़े पैमाने पर मतदाताओं को मतदाता सूची से बाहर किए जाने के कारण सवालों के घेरे में है।
सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) इस फर्जी तरीके से धन के संचय के पीछे चल रहे रैकेट को उजागर करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा उच्च स्तरीय न्यायिक जांच की मांग करती है। इसके अलावा, शीर्ष अदालत को यह सुनिश्चित करने के लिए सुधारों का मार्गदर्शन करना चाहिए कि हिंदुस्तान की चुनाव प्रणाली को विश्वसनीयता, पारदर्शिता और ईमानदारी के स्तंभों पर पुनर्निर्मित किया जाए। केवल ऐसे निर्णायक कदमों के माध्यम से ही लोकतंत्र की पवित्रता की रक्षा की जा सकती है और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनावों में जनता का विश्वास बहाल किया जा सकता है।
इलियास मुहम्मद थुम्बे
राष्ट्रीय महासचिव
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