
मतदाताओं के अधिकार बचाने के लिए न्यायपालिका को सतर्क रहना चाहिए
सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण को बरकरार रखने वाले सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर गंभीर चिंता व्यक्त करती है। यह फैसला गलत तरीके से नाम हटाए जाने, दस्तावेजों पर अत्यधिक निर्भरता तथा गरीब, प्रवासी, ग्रामीण और हाशिए पर रहने वाले समुदायों के मताधिकार से वंचित होने के बढ़ते खतरे को लेकर गंभीर आशंकाएं पैदा करता है, जबकि वे दशकों से वास्तविक मतदाता रहे हैं।
हालांकि न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची से नाम हटाना नागरिकता समाप्त करने के समान नहीं है, लेकिन हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों ने ऐसे अभियानों के संभावित दुरुपयोग को लेकर जनता की चिंता को और बढ़ा दिया है। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी द्वारा “डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट” नीति की वकालत तथा कथित घुसपैठियों को लेकर नितिन नवीन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित भाजपा नेताओं के समान बयानों ने इस आशंका को मजबूत किया है कि बड़े पैमाने पर मतदाता सत्यापन अभियान धीरे धीरे संदेह, निशाना बनाने और बहिष्कार के औजार बन सकते हैं। एसडीपीआई सम्मानपूर्वक न्यायपालिका से आग्रह करती है कि वह संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के प्रति सतर्क रहे और यह सुनिश्चित करे कि किसी भी नागरिक को मनमानी या राजनीतिक रूप से प्रेरित प्रक्रियाओं के माध्यम से लोकतांत्रिक भागीदारी से वंचित न किया जाए।
एम के फैजी
राष्ट्रीय अध्यक्ष
सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया
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