
2026 विधानसभा चुनावों में कथित अनियमितताओं को लेकर एसडीपीआई ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की
सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया ने 2026 विधानसभा चुनावों की निष्पक्षता और विश्वसनीयता की रक्षा करने में गंभीर विफलता का आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की है। पार्टी ने पश्चिम बंगाल की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR) के दौरान चुनावों से पहले लगभग 90 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की खबरें सामने आई हैं। एसडीपीआई ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) के मतदान से पहले और बाद के सीरियल नंबरों में कथित विसंगतियों से जुड़े आरोपों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि इस तरह के दावों ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर जनता के अविश्वास को और बढ़ा दिया है।
एसडीपीआई ने मतदान से पहले वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के तबादलों की भी आलोचना करते हुए कहा कि ऐसे कदमों ने संस्थागत निष्पक्षता और चुनावी प्रक्रिया की न्यायसंगतता को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा की हैं। पार्टी ने आगे कहा कि पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में मतदान के बाद हुई हिंसा का दंगों में बदल जाना इस बात पर गंभीर सवाल खड़े करता है कि चुनावों के बाद भी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की तैनाती के पीछे वास्तविक मंशा और प्रभावशीलता क्या थी, जबकि पहले कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए उनकी मौजूदगी का आश्वासन दिया गया था।
असम का उल्लेख करते हुए पार्टी ने आरोप लगाया कि वहां का चुनाव प्रचार सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और पहचान आधारित बयानबाजी से प्रभावित रहा, जिसने सामाजिक विभाजन को और गहरा किया तथा शासन, जनकल्याण और समावेशी विकास जैसे मुद्दों को पीछे धकेल दिया।
विज्ञप्ति में तमिलनाडु की राजनीतिक स्थिति का भी उल्लेख करते हुए आरोप लगाया गया कि 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरने के बावजूद तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने से राज्यपाल का इनकार एक राजनीतिक रूप से प्रेरित कदम को दर्शाता है, जो लोकतांत्रिक परंपराओं को कमजोर करता है। एसडीपीआई ने कहा कि पार्टी को विधानसभा में बहुमत साबित करने का अवसर न देना संवैधानिक पद के माध्यम से लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास है।
जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग करते हुए पार्टी ने पश्चिम बंगाल की चुनावी प्रक्रिया की समयबद्ध और स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग की, जिसमें मतदाता सूची संशोधन, EVM सीरियल नंबरों में कथित विसंगतियां, प्रशासनिक तबादले तथा मतदान के दौरान और बाद में केंद्रीय एजेंसियों की भूमिका शामिल हो। एसडीपीआई ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का विश्वास बहाल करने और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनावों को भारतीय गणराज्य की आधारशिला बनाए रखने के लिए तत्काल सुधारात्मक कदम आवश्यक हैं।
एम के फैज़ी
राष्ट्रीय अध्यक्ष
सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया
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