
चीफ इलेक्शन कमिशनर ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें; सुप्रीम कोर्ट मतदाता हटाने की प्रक्रिया पर रोक लगाए
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया की स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (एसआईआर) की कार्यप्रणाली को लेकर सामने आए चौंकाने वाले खुलासे गंभीर सवाल खड़े करते हैं। इनसे यह आरोप सामने आता है कि चीफ इलेक्शन कमिशनर ने एसआईआर के जरिए मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया को गलत मंशा से आगे बढ़ाया।
अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच अन्य दो इलेक्शन कमिशनरों—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—द्वारा कम से कम 14 बार दर्ज की गई आपत्तियां बताती हैं कि एसआईआर सहित कई महत्वपूर्ण फैसले उनकी जानकारी के बिना लिए गए।
पश्चिम बंगाल और दिल्ली के विधानसभा चुनाव परिणाम भी गंभीर सवाल उठाते हैं। कई सीटों पर जीत का अंतर उन मतों की संख्या के करीब था, जिन्हें “लॉजिकल डिस्क्रेपेंसीज़” के तहत चिन्हित किया गया था। विधानसभा चुनावों की घोषणा के बाद मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ दायर अपीलों में 90 प्रतिशत से अधिक मामलों में मतदाताओं के पक्ष में फैसला हुआ। इससे यह सामने आया कि हटाए गए लाखों मतदाताओं में बड़ी संख्या में लोग वास्तविक मतदाता थे।
नागरिक समाज और विपक्ष की लगातार आपत्तियों, अपीलों और चेतावनियों के बावजूद चीफ इलेक्शन कमिशनर ने एसआईआर की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। यह प्रक्रिया केंद्र की सरकार को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किए जाने का गंभीर आरोप सामने लाती है। यह लोकतंत्र पर सीधा हमला है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।
इसलिए ज्ञानेश कुमार को तत्काल अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए और सुप्रीम कोर्ट को मामले की पारदर्शी जांच होने तक मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया पर रोक लगानी चाहिए।
दहलान बाकवी
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष
सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई)
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