
गृह मंत्रालय द्वारा जनसांख्यिकीय बदलावों पर उच्च-स्तरीय समिति की नियुक्ति अत्यंत संदिग्ध और अनावश्यक है
गृह मंत्रालय द्वारा गठित जनसांख्यिकीय बदलावों पर उच्च-स्तरीय समिति (एचएलसीडीसी) द्वारा पिछले 15 वर्षों के धर्मवार आंकड़ों के आधार पर “जनसांख्यिकीय बदलावों” की जांच किया जाना अत्यंत संदिग्ध और विभाजनकारी है।
समिति ने राज्यों से व्यापक धर्मवार और जिलावार आंकड़े मांगे हैं। इनमें जन्म एवं वाहनों के पंजीकरण, स्कूलों में नामांकन, संपत्ति के लेन-देन, धार्मिक स्थलों, आधार नामांकन, मतदाता पहचान-पत्र, राशन कार्ड तथा पिछले 15 वर्षों से संबंधित अन्य अभिलेखों की जानकारी शामिल है।
इस कवायद के पीछे की मंशा गंभीर चिंता पैदा करती है। भारत के अधिकांश राज्यों में धर्म के आधार पर आंकड़े अलग-अलग दर्ज नहीं किए जाते हैं, सिवाय जन्म पंजीकरण जैसे कुछ सीमित मामलों के। धार्मिक आधार पर इस प्रकार की जानकारी मांगना अनुचित है और यह उस संवैधानिक सिद्धांत के विपरीत है, जिसके अनुसार राज्य धर्म के आधार पर नागरिकों के साथ भेदभाव नहीं कर सकता।
देश के युवाओं के लिए रोजगार सृजन, महंगाई पर नियंत्रण और भ्रष्टाचार से निपटने जैसी तात्कालिक प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, केंद्र सरकार ऐसी अनावश्यक और संवैधानिक रूप से संदिग्ध कवायदों के माध्यम से जनता का ध्यान भटकाती हुई दिखाई दे रही है।
एम.के. फैज़ी
राष्ट्रीय अध्यक्ष
सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया
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