ग़ाज़ा से क़तर तक: एसडीपीआई ने की इस्राइल की दहशतगर्दी ख़त्म करने की मांग

सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ इंडिया के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मोहम्मद शफ़ी ने क़तर की संप्रभुता पर इस्राइल के कायराना हमले की कड़ी निंदा की है। यह हमला न केवल अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों और मानकों का खुला उल्लंघन है, बल्कि दोहा में हमास नेतृत्व को निशाना बनाकर इस्राइल ने निर्दोष ज़िंदगियों को ख़तरे में डाला है और शांति स्थापना में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे क़तर को अस्थिर करने का दुस्साहस किया है। इस तरह की आक्रामक कार्रवाइयाँ इस्राइल की कूटनीतिक पवित्रता के प्रति घोर उपेक्षा को उजागर करती हैं और इन पर वैश्विक स्तर पर कड़ा विरोध होना चाहिए।

इस्राइल पूरे एशियाई महाद्वीप और उससे आगे तक के लिए गंभीर ख़तरा है। वह केवल सीधे हमलों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रॉक्सी युद्ध छेड़ता है, लक्षित हत्याएँ करता है, विदेशी नेताओं की जासूसी करता है, संवेदनशील आँकड़े चुराता है, आतंकवादी समूहों को हथियार पहुँचाता है और दुनिया भर के फ़ासीवादी तत्वों को मज़बूत करता है। ग़ाज़ा से लेकर लेबनान, यमन, सीरिया और अब क़तर तक—इस्राइल की विस्तारवादी नीतियाँ अस्थिरता को बढ़ा रही हैं, जिससे देशों में विभाजन और संघर्ष की स्थितियाँ पैदा हो रही हैं। एशियाई देशों, जिनमें भारत भी शामिल है, को इस ख़तरे को समझते हुए अपनी सामूहिक सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए एकजुट होना होगा।

ग़ाज़ा में जारी इस्राइल का नरसंहार मानवीय त्रासदी का भयावह रूप है। अब तक 67,000 से अधिक फ़िलिस्तीनी मारे जा चुके हैं, जबकि असंख्य लोग भुखमरी, विस्थापन और अंधाधुंध बमबारी का शिकार हो रहे हैं। जानबूझकर की गई नाकेबंदी और बुनियादी ढाँचे की तबाही ने ग़ाज़ा को जीवित नर्क में बदल दिया है, जहाँ बच्चे और आम नागरिक इस बर्बरता का सबसे ज़्यादा शिकार हैं। दुनिया अब इन अत्याचारों को और अधिक नज़रअंदाज़ नहीं कर सकती।

आज वैश्विक सहमति उभर रही है—दुनिया के दो-तिहाई से अधिक देश संयुक्त राष्ट्र से इस्राइल पर व्यापक प्रतिबंध लगाने और निर्णायक सैन्य कार्रवाई शुरू करने की मांग कर रहे हैं। फ़िलिस्तीन की आज़ादी के लिए उठ रही वैश्विक पुकार को अब वास्तविक न्याय में बदलना होगा। संयुक्त राष्ट्र को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए और रूस तथा चीन जैसे प्रमुख देशों का सहयोग लेकर इस्राइल के ख़िलाफ़ सैन्य हस्तक्षेप लागू करना चाहिए। यह केवल जवाबदेही की मांग नहीं है, बल्कि दण्डमुक्ति का अंत और शांति की बहाली की अनिवार्य आवश्यकता है।

एसडीपीआई फ़िलिस्तीनी जनता और इस्राइली आक्रामकता के सभी पीड़ितों के साथ एकजुटता प्रकट करती है। हम भारत सरकार से आह्वान करते हैं कि वह इस वैश्विक आवाज़ में शामिल हो, आक्रांताओं से संबंध तोड़े और न्याय के पक्ष में खड़ी हो। आइए, हम मिलकर एक ऐसा विश्व बनाएं जो क़ब्ज़े और आतंक से मुक्त हो।