ईडी की मनमानी पर मद्रास हाईकोर्ट का निर्णय एक चेतावनी है

सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मोहम्मद शफी ने मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा की जा रही निरंतर अतिरेकपूर्ण कार्रवाई पर गहरी चिंता और कठोर निंदा व्यक्त की है। हाल ही में आरकेएम पावरजेन मामले में मद्रास उच्च न्यायालय के निर्णय ने स्पष्ट रूप से उजागर किया है कि किस प्रकार मोदी सरकार ने केंद्रीय एजेंसियों का उपयोग असहमति को दबाने, व्यापारिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने और लोकतंत्र की नींव को कमजोर करने के लिए किया है।

मद्रास हाईकोर्ट की यह टिप्पणी कि ईडी कोई “ड्रोन” या “सुपर कॉप” नहीं है जिसे मनमर्जी से काम करने की छूट हो, एक महत्वपूर्ण कानूनी सच्चाई को रेखांकित करती है—ईडी का अधिकार क्षेत्र केवल उन्हीं मामलों तक सीमित है जिनमें पूर्व अपराध (predicate offence) और अपराध से उत्पन्न संपत्ति (proceeds of crime) स्पष्ट रूप से मौजूद हो। बिना किसी प्राथमिक शिकायत या न्यायिक निरीक्षण के की गई संपत्ति जब्ती, PMLA की धारा 66(2) का स्पष्ट उल्लंघन है, जो यह स्पष्ट रूप से निर्देशित करती है कि गैर-PMLA अपराधों को संबंधित एजेंसियों को सौंपा जाना चाहिए।

मोदी शासन के अंतर्गत ईडी एक राजनीतिक हथियार बन गया है, जिसका इस्तेमाल विपक्षी नेताओं, कार्यकर्ताओं और आलोचनात्मक व्यवसायों को डराने-धमकाने के लिए किया जा रहा है। एसडीपीआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष एम.के. फैज़ी की झूठे PMLA आरोपों में गिरफ्तारी इस दुरुपयोग का जीवंत उदाहरण है। ऐसे कृत्य न केवल संस्थानों की स्वतंत्रता और जनता के विश्वास को चोट पहुँचाते हैं, बल्कि वैध व्यापार गतिविधियों को बाधित कर निवेश को भी हतोत्साहित करते हैं।

एसडीपीआई न्यायपालिका के इस समयानुकूल हस्तक्षेप का स्वागत करती है। मद्रास हाईकोर्ट का यह निर्णय, और सुप्रीम कोर्ट का विजय मदनलाल चौधरी बनाम भारत संघ में दिया गया पूर्व निर्णय, यह स्पष्ट करता है कि बिना पूर्व अपराध के PMLA की कार्यवाही नहीं चल सकती।

परंतु केवल न्यायिक टिप्पणियां पर्याप्त नहीं हैं। एसडीपीआई यह मांग करती है कि ईडी को उसकी कानूनी सीमाओं के भीतर कार्य करने के लिए तत्काल और व्यापक सुधार लागू किए जाएं। केंद्रीय एजेंसियों पर न्यायिक निगरानी हो, दुरुपयोग से बचाव के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए जाएं और अन्यायपूर्ण जब्ती के पीड़ितों को मुआवज़ा मिले। ईडी और सीबीआई जैसी संस्थाओं की स्वतंत्रता बहाल की जाए।

एसडीपीआई उन सभी लोगों के साथ पूरी एकजुटता के साथ खड़ी है जो इन सत्तावादी चालों का शिकार हुए हैं। हम नागरिकों और नागरिक समाज से अपील करते हैं कि वे कानून के शासन पर हो रहे हमले का विरोध करें। लोकतंत्र केवल सतत सतर्कता और सामूहिक कार्रवाई से ही सुरक्षित रह सकता है।