
अरावली से जुड़े आदेश पर एसडीपीआई की प्रतिक्रिया:
“भाजपा सरकार ने खनन हितों को संरक्षण देने की कोशिश की, लेकिन जन आंदोलनों ने इसे रोका”
सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) ने अरावली पहाड़ियों से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट के उस ऐतिहासिक फैसले का स्वागत किया है, जिसमें 100 मीटर ऊंचाई की परिभाषा पर रोक लगाई गई है। पार्टी का कहना है कि इस निर्णय से बड़े पैमाने पर होने वाले पर्यावरणीय विनाश और अनियंत्रित खनन पर प्रभावी रोक लगी है।
एसडीपीआई ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार तथा राजस्थान, हरियाणा, गुजरात और दिल्ली की भाजपा सरकारों द्वारा अरावली क्षेत्र की सुरक्षा से जुड़े नियमों को इस तरह बदला जा रहा था, जिससे बड़े खनन कॉरपोरेट घरानों को सीधा लाभ मिल सके। यह कोई नीतिगत सुधार नहीं था, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के कानूनों को कमजोर कर कॉरपोरेट हितों को आगे बढ़ाने का प्रयास था।
पार्टी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला इस सच्चाई को उजागर करता है कि पर्यावरणीय सुरक्षा को कमजोर करना केवल जंगलों और वन्यजीवों के लिए ही नहीं, बल्कि किसानों की खेती, गांवों के जल स्रोतों, जनस्वास्थ्य और जलवायु संतुलन के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करता है।
जब पहाड़ नष्ट होते हैं, तो भूजल स्तर गिरता है, धूल प्रदूषण बढ़ता है और ग्रामीण आजीविका पर गहरा असर पड़ता है। ऐसे में लाभ कुछ चुनिंदा खनन कंपनियों को होता है, जबकि उसकी कीमत आम जनता को चुकानी पड़ती है।
एसडीपीआई ने यह भी कहा कि यह फैसला साबित करता है कि जन आंदोलनों, नागरिक संघर्षों और जिम्मेदार राजनीतिक हस्तक्षेप से आज भी पर्यावरण और जनहित की रक्षा संभव है।
एसडीपीआई केंद्र और राज्य सरकारों से मांग करती है कि अरावली के संवेदनशील क्षेत्रों में तत्काल प्रभाव से खनन पर पूर्ण रोक लगाई जाए तथा ऐसे मजबूत और स्थायी कानून बनाए जाएं, जिससे भविष्य में पर्यावरण संरक्षण से किसी भी प्रकार का समझौता न किया जा सके।
“सबक बिल्कुल स्पष्ट है—यदि आज प्रकृति की रक्षा नहीं की गई, तो आने वाली पीढ़ियों को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।”
मोहम्मद शफी
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष,
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