
बीफ़ निर्यात विदेश को, लिंचिंग इनाम देश को
एसडीपीआई ने मोदी शासन की बीफ़ राजनीति को बेनकाब किया
सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ इंडिया के राष्ट्रीय महासचिव इलियास थुम्बे ने हिंदुस्तान के बीफ़ निर्यात उद्योग को लेकर भाजपा नेतृत्व वाले मोदी शासन की खुली दोहरी नीति और पाखंड की कड़ी निंदा की है। 2014 में सत्ता संभालने से पहले नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस सरकार की तथाकथित “पिंक क्रांति” की तीखी आलोचना की थी, यह आरोप लगाते हुए कि अल्पसंख्यकों को खुश करने के लिए बीफ़ निर्यात को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने वादा किया था कि सत्ता में आने के बाद इस व्यापार को समाप्त कर देंगे और इसे हिंदू भावनाओं के खिलाफ बताया था। मगर विडंबना यह है कि उनके शासन में हिंदुस्तान दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बीफ़ निर्यातक बन चुका है। 2025 में 16.5 लाख मीट्रिक टन निर्यात होने का अनुमान है, जो 2024 से 4 प्रतिशत और 2014 से 16 प्रतिशत अधिक है। यह उद्योग प्रतिवर्ष 4 अरब डॉलर से अधिक का राजस्व उत्पन्न करता है, मुख्यतः भैंस के मांस से, लेकिन व्यापक तस्करी और कमजोर निगरानी से गाय और भैंस के वध के बीच की रेखाएँ धुंधली हो गई हैं।
विडंबना यह भी है कि बड़े निर्यातक जैसे अल-कबीर निर्यात हिन्दू स्वामित्व वाले हैं और मोदी शासन उन्हें प्रदर्शन पुरस्कार देता है, साथ ही मुस्लिम-बहुल देशों में हलाल प्रमाणित निर्यात को सब्सिडी भी प्रदान करता है। जबकि घरेलू स्तर पर भाजपा शासित राज्य हलाल उत्पादों पर प्रतिबंध लगाते हैं और तथाकथित ‘गौरक्षक’ आतंक को खुला छोड़ देते हैं, जिसके चलते महज़ बीफ़ रखने के शक में मुसलमानों और दलितों की लिंचिंग तक हो जाती है।
यह दोहरा रवैया भाजपा की निंदनीय राजनीति को उजागर करता है—चुनावों में गाय संरक्षण का नारा और विदेश में उसी व्यापार से अरबों की कमाई। चुनावी बांड के आँकड़े यह भी बताते हैं कि भाजपा को बीफ़ निर्यातकों से करोड़ों का चंदा मिला है, जिससे उनकी नैतिक दिवालियापन पूरी तरह सामने आ जाती है।
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