10 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शन पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला है

सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) मतदाता सूची में जवाबदेही की मांग तथा विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर उठाई जा रही चिंताओं के संदर्भ में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की कड़ी निंदा करती है।

आम लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाना, प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेना और शांतिपूर्ण सभा के अधिकार का हनन करना आपातकाल की भयावह यादों को ताजा करता है। लोकतंत्र में पारदर्शिता की मांग करने वाले नागरिकों के साथ इस तरह व्यवहार नहीं किया जा सकता, मानो वे कोई खतरा हों।

एसडीपीआई मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, निर्वाचन आयुक्त अधिनियम, 2023 को निरस्त करने, SIR में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच कराने तथा SIR की अवैध प्रक्रियाओं को रद्द करने की मांग करती है। जिन स्थानों पर अवैध मतदाता सूची प्रक्रियाओं के कारण चुनाव की निष्पक्षता गंभीर रूप से प्रभावित हुई है, वहां कानून के अनुसार चुनाव निरस्त कर दोबारा कराए जाने चाहिए।

निर्वाचन आयोग का स्वतंत्र, पारदर्शी और जवाबदेह होना अनिवार्य है। मतदान के अधिकार से कोई समझौता नहीं किया जा सकता, लोकतांत्रिक असहमति को दबाया नहीं जा सकता और कोई भी संवैधानिक प्राधिकरण जनता के प्रति जवाबदेही से ऊपर नहीं है।

एम. के. फैज़ी
राष्ट्रीय अध्यक्ष
सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI)