
हिंदुस्तानी जलक्षेत्र के पास ईरानी युद्धपोत पर अमेरिकी हमला मोदी सरकार की रणनीतिक विफलता को उजागर करता है
सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सीताराम खोइवाल ने 3 मार्च 2026 को हिंद महासागर में एक अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस डेना को डुबोए जाने की घटना की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई साम्राज्यवादी अहंकार का स्पष्ट उदाहरण है और यह भी दिखाती है कि मोदी सरकार हिंदुस्तान की संप्रभुता तथा क्षेत्रीय स्थिरता की रक्षा करने में पूरी तरह विफल रही है। यह जहाज 18 से 25 फरवरी के बीच विशाखापत्तनम में आयोजित मिलन 2026 अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू और नौसैनिक अभ्यास में सम्मानित अतिथि के रूप में भाग लेने के बाद अपने देश लौट रहा था। श्रीलंका के निकट अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र से गुजरते समय इस पर विश्वासघाती हमला किया गया, जिसमें कम से कम 87 लोगों की दुखद मृत्यु हो गई और दर्जनों अब भी लापता बताए जा रहे हैं। भोर में प्राप्त आपात संदेश और उसके बाद 4 मार्च को अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ द्वारा इस हमले की पुष्टि यह संकेत देती है कि यह एक पूर्व नियोजित कार्रवाई थी जिसने अंतरराष्ट्रीय नियमों और मानदंडों की खुलेआम अवहेलना की है।
खोइवाल ने कहा कि इस जघन्य घटना के लिए मोदी सरकार को अपनी जिम्मेदारी से बचने नहीं दिया जा सकता। उन्होंने कहा कि वाशिंगटन के साथ क्वाड के माध्यम से बढ़ते रणनीतिक संबंधों के बीच ईरानी जहाजों को आमंत्रित करने के बाद भी उनकी सुरक्षा सुनिश्चित न कर पाना सरकार की गंभीर कूटनीतिक और सुरक्षा विफलता को दर्शाता है। हमारे समुद्री क्षेत्र के इतने निकट ऐसी घटना होना यह दर्शाता है कि हिंदुस्तान के समुद्री हितों और क्षेत्रीय संतुलन को विदेशी शक्तियों के प्रभाव के हवाले कर दिया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस हमले के संबंध में पहले से कोई खुफिया सूचना थी और यदि थी तो उसे साझा क्यों नहीं किया गया। उन्होंने यह भी पूछा कि जब श्रीलंका के बचाव दल समुद्र से शव बरामद कर रहे थे तब विदेश मंत्रालय की ओर से कोई स्पष्ट और मजबूत प्रतिक्रिया क्यों नहीं आई।
उन्होंने चेतावनी दी कि यह घटना हिंदुस्तान की ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय शांति के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है। ईरान लंबे समय से तेल और ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण साझेदार रहा है और इस प्रकार की सैन्य कार्रवाइयाँ पूरे क्षेत्र में तनाव को बढ़ाकर दक्षिण एशिया को अस्थिर कर सकती हैं। इससे व्यापार मार्गों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और व्यापक संघर्ष की आशंका बढ़ सकती है।
सीताराम खोइवाल ने मांग की कि इस पूरे प्रकरण में प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका और सरकार की विफलताओं की तुरंत संसदीय जांच कराई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि हिंदुस्तान को अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय शांति की रक्षा के लिए स्पष्ट और स्वतंत्र नीति अपनानी चाहिए तथा इस घटना के खिलाफ ईरान के साथ एकजुटता प्रकट करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उन नाविकों का खून उस व्यवस्था की जिम्मेदारी को याद दिलाता है जिसने संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों से अधिक विदेशी शक्तियों की नीतियों को महत्व दिया है।
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