सीएजी द्वारा पीएमकेवीवाई में खामियां उजागर किए जाने के बाद एसडीपीआई ने जवाबदेही की मांग की

सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान पेश की गई प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की प्रदर्शन ऑडिट रिपोर्ट को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करती है। एसडीपीआई की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष यास्मिन फारूक़ी ने मोदी सरकार की इस प्रमुख कौशल विकास योजना में सामने आई गंभीर खामियों की कड़ी निंदा की है, जो शासन और जवाबदेही में प्रणालीगत विफलताओं को उजागर करती हैं।

ऑडिट रिपोर्ट में चौंकाने वाली अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। इसमें राज्यों में 94.53 प्रतिशत लाभार्थियों के बैंक खातों के विवरण शून्य, खाली या अमान्य दर्ज पाए गए। डुप्लीकेट तस्वीरें, एक ही मोबाइल नंबरों की पुनरावृत्ति और फर्जी ईमेल पते व्यापक डेटा हेरफेर और संभावित फर्जी नामांकन की ओर इशारा करते हैं। वर्ष 2015 से 2022 के बीच लगभग 14,450 करोड़ रुपये के व्यय और 1.32 करोड़ उम्मीदवारों को लक्षित करने के बावजूद, यह योजना मात्र 41 प्रतिशत की निराशाजनक प्लेसमेंट दर हासिल कर सकी। नामांकन में आयु, शिक्षा और अनुभव से संबंधित निर्धारित मानदंडों की अनदेखी की गई, जबकि 222.63 करोड़ रुपये की राशि में देरी और कम उपयोग की समस्या सामने आई। गैर-कार्यात्मक प्रशिक्षण केंद्र और बाजार की मांग के अपर्याप्त आकलन इस कार्यक्रम की अक्षमता को और उजागर करते हैं।

यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि भारत के युवाओं के साथ विश्वासघात है, जो कौशल विकास और रोजगार के वास्तविक अवसरों के हकदार हैं। मोदी सरकार की बहुचर्चित पहल ने बढ़ती बेरोजगारी के बीच विफलताओं को छिपाने के लिए आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हुए सार्वजनिक संसाधनों की बर्बादी की है। इस तरह का कुप्रबंधन राष्ट्रीय कार्यक्रमों में जनता के विश्वास को कमजोर करता है और पारदर्शी, जन-केंद्रित नीतियों की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

एसडीपीआई कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय से जवाबदेही की मांग करती है और पीएमकेवीवाई 4.0 में ऐसी खामियों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुधारात्मक कदम उठाने का आग्रह करती है। हम सरकार से अपील करते हैं कि वह रोजगार बाजार से जुड़े वास्तविक कौशल विकास को प्राथमिकता दे और यह सुनिश्चित करे कि इसके लाभ हाशिए पर मौजूद समुदायों तक पहुंचें। एसडीपीआई समान और न्यायसंगत विकास की पैरवी के लिए प्रतिबद्ध है और सत्तारूढ़ व्यवस्था की चूकों के लिए उसे जवाबदेह ठहराती रहेगी।

यास्मिन फारूक़ी
राष्ट्रीय महासचिव