
टोंक से एक बेहद चिंताजनक वीडियो सामने आया है, जिसमें पूर्व भाजपा सांसद सुखबीर सिंह जौनपुरिया कंबल वितरण कार्यक्रम के दौरान एक महिला से उसका नाम और धर्म पूछते दिख रहे हैं, और जैसे ही वह खुद को मुस्लिम बताती है, सहायता वापस लेने का संकेत देते हैं। सेवा के नाम पर भेदभाव करना लोकतंत्र, महिलाओं की गरिमा और मूल मानवता का अपमान है। जब मंचों से “मातृशक्ति” के सम्मान और “सबका साथ, सबका विकास” का वादा किया जाता है, तो क्या वह सम्मान शर्तों के साथ आता है? क्या यही महिलाओं के सम्मान की राजनीति है? सम्मान नारों से नहीं, व्यवहार से साबित होता है। देश जवाब चाहता है।
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