
जनसाहस से ही लोकतंत्र कायम और सुरक्षित रहता है
न्याय को सत्ता के बल पर निर्मित नहीं किया जा सकता, और न ही संस्थाओं के दुरुपयोग से सत्य को दबाया जा सकता है। एसडीपीआई राष्ट्रीय अध्यक्ष एम. के. फ़ैज़ी को मिली ज़मानत इस बात की स्पष्ट पुष्टि है कि निरंतर कानूनी संघर्ष और लोकतांत्रिक दृढ़ता, राजनीतिक लाभ के लिए असहमति को दबाने के हर प्रयास से अधिक शक्तिशाली सिद्ध होंगे। यह क्षण संवैधानिक सिद्धांतों की स्थायी शक्ति और क़ानून के शासन में जनता के अटूट विश्वास को दर्शाता है।
जो लोग सत्ता में रहकर एजेंसियों को विपक्षी आवाज़ों को डराने के औज़ार के रूप में इस्तेमाल करना चाहते हैं, उनके लिए यह घटनाक्रम एक गंभीर स्मरण है कि संविधान दबाव से अधिक मज़बूत है और जनता की सामूहिक इच्छा किसी भी भय की मशीनरी से बड़ी है। लोकतांत्रिक संस्थाएँ स्वतंत्रता की रक्षा के लिए होती हैं, उसे दबाने के लिए नहीं, और इस मार्ग से कोई भी विचलन अंततः न्याय और जनचेतना की शक्ति द्वारा सुधारा जाएगा।
मैं हमारे कार्यकर्ताओं, समर्थकों और न्याय तथा लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले सभी नागरिकों से आह्वान करता हूँ कि वे इस क्षण से नया साहस प्राप्त करें। आइए हम एकजुट, निडर और प्रत्येक नागरिक की गरिमा, समानता और अधिकारों के लिए सिद्धांतनिष्ठ संघर्ष में अडिग बने रहें। सत्ता मार्ग में बाधाएँ खड़ी कर सकती है, लेकिन सत्य आगे बढ़ता रहता है, और जनता के साहस के माध्यम से लोकतंत्र अवश्य विजयी होगा।
मोहम्मद शफी
राष्ट्रीय कार्यवाहक अध्यक्ष
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