
गाज़ा के नरसंहार में भुखमरी को युद्ध का हथियार बनाए जाने की सख़्त निंदा करें।
इसराइल और अमेरिका की सरकारों ने गाज़ा में चल रहे जनसंहार के दौरान भूख को एक हथियार में बदल दिया है। बीते चार हफ्तों में इसराइली बलों द्वारा 600 से अधिक फ़िलिस्तीनी युवाओं को गोलियों से मार दिया गया, जब वे गाज़ा ह्यूमैनिटेरियन फ़ाउंडेशन (GHF) द्वारा संचालित सहायता वितरण केंद्रों से खाने के पैकेट लेने की कोशिश कर रहे थे। यह फाउंडेशन अमेरिका और इसराइल के नियंत्रण में काम कर रहा है।
संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) ने रिपोर्ट किया है कि मई के अंत से—जब से GHF ने गाज़ा में राहत वितरण का ज़िम्मा संभाला—कम से कम 613 लोगों की मौत गोली लगने से इन केंद्रों पर हुई है। यह आंकड़े 27 जून तक अस्पतालों और अन्य स्रोतों से मिली जानकारी पर आधारित हैं, लेकिन एजेंसी का कहना है कि इसके बाद भी इस तरह की कई घटनाएं हुई हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने बताया है कि गाज़ा के खान यूनिस स्थित नासिर अस्पताल—जो गिनती के बचे हुए सक्रिय अस्पतालों में है—अब “एक विशाल ट्रॉमा सेंटर” बन चुका है, जहां हर दिन सहायता केंद्रों से लाए गए सैकड़ों गोली लगने के मामलों का इलाज किया जा रहा है। फ़िलिस्तीनी अधिकारियों के अनुसार, बीते चार हफ्तों में सहायता केंद्रों पर कम से कम 4000 गोली लगने की घटनाएं हुई हैं।
GHF ने गाज़ा में सहायता वितरण अपने हाथ में लिया, क्योंकि इसराइल ने संयुक्त राष्ट्र एजेंसी और अन्य अंतरराष्ट्रीय राहत संगठनों को वहां काम करने की अनुमति नहीं दी। संयुक्त राष्ट्र की राहत और कार्य एजेंसी (UNRWA) गाज़ा में 400 सहायता वितरण केंद्र चला रही थी, लेकिन इसराइल और अमेरिका ने उस पर “आतंकवादी संगठनों” से जुड़े होने का आरोप लगाकर उसे वहां से हटने पर मजबूर कर दिया।
GHF ने गाज़ा में केवल चार सहायता केंद्र खोले—तीन दक्षिण में और एक बीच में—जबकि उत्तर में, जहां हालात सबसे भयावह हैं, कोई भी केंद्र नहीं खोला गया। दो मिलियन से अधिक की आबादी वाले गाज़ा में यह व्यवस्था बेहद अपर्याप्त है। चूंकि गाज़ा में स्वतंत्र रूप से खाद्य सामग्री और अन्य ज़रूरी सामान तक पहुंच नहीं है, लोग केवल इन राहत केंद्रों पर निर्भर हैं। इन्हीं निहत्थे और लाचार लोगों पर इसराइली बल अंधाधुंध गोलियां चला रहे हैं। चिकित्सा अधिकारियों के अनुसार, मारे गए या घायल हुए अधिकांश लोगों को सिर और ऊपरी शरीर में गोलियां लगी हैं, जो इस हमले की मंशा को उजागर करता है। दरअसल, अब इन राहत केंद्रों को “मौत के जाल” के रूप में जाना जाने लगा है।
यह स्थिति किसी सभ्य दुनिया में कल्पना से भी परे है, लेकिन यह सब वैश्विक समुदाय की आंखों के सामने हो रहा है। कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों और मानवाधिकार संगठनों ने GHF के संचालन को तुरंत रोकने और राहत वितरण की ज़िम्मेदारी संयुक्त राष्ट्र और अन्य एजेंसियों को वापस सौंपने की मांग की है। लेकिन अमेरिका और इसराइल विश्व जनमत की बिल्कुल भी परवाह नहीं कर रहे हैं।
दुनिया को इन आपराधिक कृत्यों के ख़िलाफ़ एकजुट होकर आवाज़ उठानी चाहिए, जो इसराइल और अमेरिका द्वारा गाज़ा के लोगों पर किए जा रहे हैं। यह स्पष्ट रूप से एक नरसंहार है, जिसे वैश्विक जनमत की अनदेखी करते हुए अंजाम दिया जा रहा है। यह तत्काल रोका जाना चाहिए।
एसडीपीआई हिंदुस्तान की जनता से अपील करती है कि वे गाज़ा पट्टी में फ़िलिस्तीनी जनता पर हो रहे इस भयानक अन्याय के ख़िलाफ़ अपनी आवाज़ बुलंद करें।
इल्यास मोहम्मद थुम्बे
राष्ट्रीय महासचिव
No Comments