एसडीपीआई, संयुक्त राष्ट्र में फिलिस्तीन के मुद्दे पर मोदी सरकार के विश्वासघात की कड़ी निंदा करती है
सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) ने 12 जून 2025 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में लाए गए प्रस्ताव पर मोदी सरकार द्वारा मतदान से दूरी बनाए रखने के फैसले की कड़े शब्दों में निंदा की है। यह प्रस्ताव गाज़ा में तुरंत और बिना शर्त युद्धविराम, बंधकों की रिहाई और मानवीय सहायता की अपील करता था। 149 देशों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया, जबकि भारत ने इससे किनारा कर लिया। यह निर्णय उन लाखों भारतीयों की भावनाओं के साथ धोखा है जो सदैव फिलिस्तीन के संघर्ष के साथ खड़े रहे हैं।
गाज़ा में अब तक 55,000 से अधिक निर्दोष लोग मारे जा चुके हैं, जिनमें अधिकांश महिलाएं और बच्चे हैं, और करीब पाँच लाख लोग इज़राइल की नाकाबंदी के कारण भुखमरी का सामना कर रहे हैं। ऐसे समय में भारत द्वारा तटस्थ रहना न केवल शर्मनाक है, बल्कि यह हमारी ऐतिहासिक फिलिस्तीन-समर्थक नीति से गंभीर विचलन है।
एसडीपीआई ने कहा कि यह रुख भारत की विदेश नीति में खतरनाक बदलाव को दर्शाता है, जहाँ मोदी सरकार इज़राइल के साथ अपने सैन्य संबंधों को प्राथमिकता दे रही है। हालिया संघर्षों में भारत द्वारा इज़रायली हथियारों पर निर्भरता इसका स्पष्ट उदाहरण है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र की राहत एजेंसी UNRWA को 35 मिलियन डॉलर की सहायता दी थी, फिर भी इस एजेंसी पर इज़राइल द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों पर कोई आपत्ति नहीं जताई गई।
एसडीपीआई फिलिस्तीन के आत्मनिर्णय के अधिकार के लिए अपने दृढ़ समर्थन को दोहराती है। पार्टी मोदी सरकार से अपील करती है कि वह युद्धविराम का समर्थन करे, दो-राष्ट्र समाधान की दिशा में पुनः प्रतिबद्धता दिखाए और आगामी फ्रांस-सऊदी शांति सम्मेलन में सक्रिय भूमिका निभाए।
एसडीपीआई सभी भारतीयों से आह्वान करती है कि वह सरकार से मानवता और न्याय के पक्ष में खड़े होने की मांग करें।
इलियास मुहम्मद थुम्बे
राष्ट्रीय महासचिव
सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया

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